बेंगलुरू। कावेरी नदी के पानी को लेकर चल रहे ताजा विवाद में आज कर्नाटक विधान परिषद ने अहम फैसला लिया है। विधान परिषद ने कावेरी नदी का पानी तमिलनाडु को नहीं देने का प्रस्ताव पारित किया। ये प्रस्ताव एकमत से पारित किया गया।
इस प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य में पेयजल के लिए पानी की आवश्यकता है। सर्वोच्च न्यायालय के 20 सितंबर के आदेश के असर पर चर्चा के लिए विधान परिषद के एक विशेष सत्र में ये प्रस्ताव पारित किया गया। इस फैसले के मुताबिक बांधों का पानी राज्य में पेयजल के लिए इस्तेमाल में लाया जाएगा और पानी तमिलनाडु को नहीं दिया जा सकता। गौरतलब है कि कावेरी निगरानी समिति ने 19 सितंबर को कर्नाटक से कहा था कि वो 21 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रतिदिन 3000 क्यूसेक पानी छोड़े। हालांकि, शीर्ष अदालत ने कर्नाटक से 27 सितंबर तक तमिलनाडु को प्रतिदिन 6,000 क्यूसेक पानी देने का आदेश दिया था। इससे पहले पांच सितंबर को शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु में किसानों की दुर्दशा को खत्म करने के लिए अगले 10 दिनों के लिए 15000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया था।
इस प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य में पेयजल के लिए पानी की आवश्यकता है। सर्वोच्च न्यायालय के 20 सितंबर के आदेश के असर पर चर्चा के लिए विधान परिषद के एक विशेष सत्र में ये प्रस्ताव पारित किया गया। इस फैसले के मुताबिक बांधों का पानी राज्य में पेयजल के लिए इस्तेमाल में लाया जाएगा और पानी तमिलनाडु को नहीं दिया जा सकता। गौरतलब है कि कावेरी निगरानी समिति ने 19 सितंबर को कर्नाटक से कहा था कि वो 21 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रतिदिन 3000 क्यूसेक पानी छोड़े। हालांकि, शीर्ष अदालत ने कर्नाटक से 27 सितंबर तक तमिलनाडु को प्रतिदिन 6,000 क्यूसेक पानी देने का आदेश दिया था। इससे पहले पांच सितंबर को शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु में किसानों की दुर्दशा को खत्म करने के लिए अगले 10 दिनों के लिए 15000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया था।

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