नई दिल्ली। टिकट वितरण में सपा, बसपा से पीछे चल रही भाजपा उम्मीदवारों की घोषणा में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती। हालात बता रहे हैं कि इस महीने भी उम्मीदवारों की कोई घोषणा नहीं होने वाली है। अभी पार्टी टिकट की चाह रखने वाले हर एक उम्मीदवार को परख रही है। जांच-परख का नया जिम्मा अब चुनावी मैनेजरों को सौंपा गया है।
उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा में पार्टी मैनेजर बिठाने जा रही है। टिकटों की चाह रखने वाले उम्मीदवारों पर मैनेजरों की निगाह होगी। हर विषय पर उम्मीदवार की पड़ताल होगी। उम्मीदवारों की रिपोर्ट सीधे केंद्रीय नेतृत्व को सौंपी जाएगी। टिकट वितरण हो या मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा कौन होगा, इस सब के मामले में भाजपा अभी सपा और बसपा से काफी पीछे चल रही है। उम्मीदवार घोषित न करने वाली कांग्रेस भी मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा मैदान में उतार चुकी है। लेकिन भाजपा नेता अभी पार्टी में किसी नए विवाद को जन्म देने के पक्ष में नहीं दिखाई दे रहे।
भाजपा यूपी विधानसभा का चुनाव जीतने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती। चुनाव से संबंधित हर कदम उठाने से पहले उसके लिए रणनीति तैयार की जा रही है। केंद्रीय नेतृत्व ने ऐसी ही एक रणनीति बनाई है मैनेजर नियुक्त करने की। मैनेजरों को भाजपा से टिकट की चाहत रखने वाले सभी उम्मीदवारों पर निगाह रखने की जिम्मेदारी दी गई है। किस उम्मीदवार की क्षेत्र में कैसी छवि है? जनसमर्थन कितना है? कोई आपराधिक इतिहास तो नहीं है? इनकी जांच-पड़ताल होगी। खास बात यह है कि मैनेजरों को हिदायत दी गई है कि वह इस सब के दौरान किसी भी स्थानीय नेता से संपर्क नहीं करेंगे। काम के दौरान किसी भी स्थानीय पदाधिकारी या कार्यकर्ता के बीच अपनी पहचान भी नहीं खोलेंगे। हर सात दिन का लेखा-जोखा होगा तैयार
सूत्रों की मानें तो 26 सितम्बर से विधानसभाओं में मैनेजरों की नियुक्ति हो जाएगी। मैनेजर हर सात दिन का तैयार डाटा भेजेंगे। बीच में स्थानीय या प्रदेशस्तर पर किसी और पदाधिकारी को मैनेजरों की जबावदेही नहीं होगी। किसी भी तरह के दबाव से मुक्त रहने के लिए मैनेजरों को सख्त हिदायत दी गई है।
मौजूदा विधायक भी परखे जाएंगे कसौटी पर
टिकट वितरण को लेकर भाजपा की नई रणनीति कितनी सख्त है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी के मौजूदा विधायक भी कसौटी पर परखे जाएंगे। विधानसभाओं में नियुक्त होने वाले मैनेजर वर्तमान विधायकों के बारे में भी रिपोर्ट तैयार करेंगे। यूपी के सिंहासन को लेकर केन्द्रीय नेतृत्व कोई कोताही नहीं चाहता है, इसीलिए पार्टी मौजूदा विधायकों को जांच की कसौटी से छूट देने के मूड़ में नहीं दिख रही है।
उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा में पार्टी मैनेजर बिठाने जा रही है। टिकटों की चाह रखने वाले उम्मीदवारों पर मैनेजरों की निगाह होगी। हर विषय पर उम्मीदवार की पड़ताल होगी। उम्मीदवारों की रिपोर्ट सीधे केंद्रीय नेतृत्व को सौंपी जाएगी। टिकट वितरण हो या मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा कौन होगा, इस सब के मामले में भाजपा अभी सपा और बसपा से काफी पीछे चल रही है। उम्मीदवार घोषित न करने वाली कांग्रेस भी मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा मैदान में उतार चुकी है। लेकिन भाजपा नेता अभी पार्टी में किसी नए विवाद को जन्म देने के पक्ष में नहीं दिखाई दे रहे।
भाजपा यूपी विधानसभा का चुनाव जीतने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती। चुनाव से संबंधित हर कदम उठाने से पहले उसके लिए रणनीति तैयार की जा रही है। केंद्रीय नेतृत्व ने ऐसी ही एक रणनीति बनाई है मैनेजर नियुक्त करने की। मैनेजरों को भाजपा से टिकट की चाहत रखने वाले सभी उम्मीदवारों पर निगाह रखने की जिम्मेदारी दी गई है। किस उम्मीदवार की क्षेत्र में कैसी छवि है? जनसमर्थन कितना है? कोई आपराधिक इतिहास तो नहीं है? इनकी जांच-पड़ताल होगी। खास बात यह है कि मैनेजरों को हिदायत दी गई है कि वह इस सब के दौरान किसी भी स्थानीय नेता से संपर्क नहीं करेंगे। काम के दौरान किसी भी स्थानीय पदाधिकारी या कार्यकर्ता के बीच अपनी पहचान भी नहीं खोलेंगे। हर सात दिन का लेखा-जोखा होगा तैयार
सूत्रों की मानें तो 26 सितम्बर से विधानसभाओं में मैनेजरों की नियुक्ति हो जाएगी। मैनेजर हर सात दिन का तैयार डाटा भेजेंगे। बीच में स्थानीय या प्रदेशस्तर पर किसी और पदाधिकारी को मैनेजरों की जबावदेही नहीं होगी। किसी भी तरह के दबाव से मुक्त रहने के लिए मैनेजरों को सख्त हिदायत दी गई है।
मौजूदा विधायक भी परखे जाएंगे कसौटी पर
टिकट वितरण को लेकर भाजपा की नई रणनीति कितनी सख्त है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी के मौजूदा विधायक भी कसौटी पर परखे जाएंगे। विधानसभाओं में नियुक्त होने वाले मैनेजर वर्तमान विधायकों के बारे में भी रिपोर्ट तैयार करेंगे। यूपी के सिंहासन को लेकर केन्द्रीय नेतृत्व कोई कोताही नहीं चाहता है, इसीलिए पार्टी मौजूदा विधायकों को जांच की कसौटी से छूट देने के मूड़ में नहीं दिख रही है।

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