
बेसिक शिक्षा विभाग में यही काम चल रहा है। कमीशन के खेल में देश के भविष्य को दांव पर लगाया जाता है। सरकार की महत्वपूर्ण योजना मिड डे मील हो या सर्व शिक्षा अभियान। कमीशन के बिना किसी योजना का क्रियान्वयन नहीं होता। इन दिनों ड्रेस वितरण का कार्य चल रहा है। पर कमीशन का स्थान इसमें भी सर्वोच्च रखा गया है। हर कोई घटिया से घटिया ड्रेस बनवाने के जुगाड़ में लगा है। वजह है विभागीय सभी अधिकारी अपना तय कमीशन लेंगे। 200 रूपये वाली ड्रेस 80 से 90 रूपये में ही बनवायी जा रही हैं। हरियावां ब्लाक के पैढई गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक संदीप कुमार यादव ने बच्चों के हित को ध्यान में रखकर जब ड्रेस का नमूना पास कराया तो उसे ख़ारिज कर दिया गया। वजह थी ड्रेस की गुणवत्ता। संदीप कुमार की माने तो ड्रेस की गुणवत्ता को ध्यान में रखा गया है। अच्छी लागत से तैयार ड्रेस में कमीशन का कोई जुगाड़ नहीं हो पाता है। इसी के चलते बढ़िया ड्रेस का नमूना नापसंद कर दिया गया और कमीशन वाली ड्रेस वितरण की हिदायत मिली। चूँकि प्रधानाध्यापक संदीप यादव को उनके खंड शिक्षा अधिकारी मनोज बोस से ईमानदारी व अच्छे कार्य करने की प्रेरणा मिली है। इसलिए उन्होंने यूनिफार्म में कमीशन के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। श्री यादव ने डीएम विवेक मिश्र व आकांक्षा समिति की अध्यक्ष डा अनु वार्ष्णेय को मामले से अवगत कराकर बच्चों के हित को ध्यान में रखने के लिए सहयोग माँगा है। वे कहते हैं कि ड्रेस के अलावा विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी सर्दियों में बच्चों को स्वेटर बाँटने की व्यवस्था में जुटे हैं। और इसकी भी प्रेरणा उन्हें खंड शिक्षा अधिकारी मनोज बोस से ही मिली है।वैसे तो जिले के लगभग सभी स्कूलों में ड्रेस घोटाले का काम तेजी से चल रहा है पर इसके विरोध में खड़े होने की हिम्मत सभी शिक्षक नही जुटा पाते। ऐसे में शिक्षक नेता भी ईमानदार अध्यापकों का साथ न देकर बेईमान अधिकारियों के साथ खड़े नजर आते हैं। संदीप कुमार की इस हिम्मत को हम सलाम करते हैं, और इस लड़ाई में उन्हें हम सब के सहयोग की जरुरत है।
हरदोई। कहते हैं बच्चे देश का भविष्य होते हैं, और जब देश के निर्माण की बुनियाद को ही कमजोर कर दिया जाये तो उस देश के भविष्य का क्या होगा ?
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