हरदोई।भाजपा के एक दिवसीय कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा मैंने बसपा से इस्तीफा इसलिए दिया था कि बसपा प्रमुख मायावती बाबा साहेब के मिशन को भूलकर दौलत कमाने में जुट गयीं। उनकी पैसे की हवस ऐसी बढ़ी कि कांशीराम जी की नीति भूलकर टिकट बेंचने का कारोबार शुरू कर दिया। जिसका खामियाजा उन्हें विगत लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ा फिर भी उनकी पैसे की भूंख अभी नहीं मिटी।
हरदोई के गांधी भवन सभागार में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए श्री मौर्या ने बसपा प्रमुख पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा मायावती ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जब पैसे लेकर टिकट बांटे तो मैंने इसका विरोध किया। कांशीराम जी की नीति याद दिलाकर कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न बंद करने के लिए कई बार कहा पर उन्होंने मेरी बात पर ध्यान नही दिया। यूपी के पंचायत चुनाव में भी टिकट के लिए आर्थिक मानक तय कर दिया गया। सदस्य जिला पंचायत के पद के लिए मायावती ने सुरक्षित सीट से ढाई लाख रूपये व सामान्य सीट के प्रत्याशी से पांच लाख रूपये तय कर दिए। मायावती पैसे की हवस में इतनी अंधी हो गयी कि उन्हें कार्यकर्ताओं की मेहनत और वफ़ादारी नहीं दिखी। बसपा को उन्होंने टिकट बेंचने का बाजार बना दिया। श्री मौर्या ने कहा कि जब मुझे लगा कि कार्यकर्ताओं के हित की रक्षा नहीं कर सकता तो मैने बीते 22 जून को अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। जो मायावती कार्यकर्ताओं से मिलना पसंद नहीं करती थी अब वही मायावती कार्यकर्ताओं के पीछे घूम रही हैं। किंतु 2017 के चुनाव में वही कार्यकर्ता इन्हें धूल चटाने की तैयारी कर चुके हैं।
हरदोई के गांधी भवन सभागार में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए श्री मौर्या ने बसपा प्रमुख पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा मायावती ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जब पैसे लेकर टिकट बांटे तो मैंने इसका विरोध किया। कांशीराम जी की नीति याद दिलाकर कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न बंद करने के लिए कई बार कहा पर उन्होंने मेरी बात पर ध्यान नही दिया। यूपी के पंचायत चुनाव में भी टिकट के लिए आर्थिक मानक तय कर दिया गया। सदस्य जिला पंचायत के पद के लिए मायावती ने सुरक्षित सीट से ढाई लाख रूपये व सामान्य सीट के प्रत्याशी से पांच लाख रूपये तय कर दिए। मायावती पैसे की हवस में इतनी अंधी हो गयी कि उन्हें कार्यकर्ताओं की मेहनत और वफ़ादारी नहीं दिखी। बसपा को उन्होंने टिकट बेंचने का बाजार बना दिया। श्री मौर्या ने कहा कि जब मुझे लगा कि कार्यकर्ताओं के हित की रक्षा नहीं कर सकता तो मैने बीते 22 जून को अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। जो मायावती कार्यकर्ताओं से मिलना पसंद नहीं करती थी अब वही मायावती कार्यकर्ताओं के पीछे घूम रही हैं। किंतु 2017 के चुनाव में वही कार्यकर्ता इन्हें धूल चटाने की तैयारी कर चुके हैं।

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