कैथल (राजकुमार अग्रवाल )
क्षेत्र में किसानों का सफेद सोना बीमारी के चलते खराब होने से किसानों की जिंदगी दांव पर लग गई। किसान पहले से ही साहूकारों के कर्ज बंध है और अब यही सही कसर इस फसल ने निकाल दी है। किसान कपास की फसल को सोना से भी ज्यादा महत्व देते है। कम वर्षा व पानी से होने वाली यह फसल इस क्षेत्र की मुख्य फसल है। यह प्रति एकड़ 35 मन से भी ज्यादा निकलती है। इस का बाजार भाव भी लगभग 5 हजार से अधिक रहता है। किसान दिनेश जाखौली, जयप्रकाश शर्मा, बलवान, पृर्थी, अजमेर, फुल कुमार आदि ने बताया कि इस प्रकार से एक एकड़ में से 50 हजार से भी अधिक की पैदावार हो जाती है। यही सोच कर किसान इस को अधिक संख्या में लगाते है। इस पर खर्चा भी कम आता है। इस क्षेत्र में धान की खेती खर्चा ज्यादा आने के बावजूद भी पैदा वार कम होती है। अब की बार इस फसल पर भयानक बीमारी की छाया पड़ गई है। किसानों के देखते ही देखते यह कपास की फसल सुख रही है। इसके ऊपर जो फल (ड़ोड़े) आये हुये है, वे भी सुख कर नीचे गिर रहे है। इसके पत्ते पहले सफेद या काले होते है और बाद में इस फसल का पौधा सुख जाता है। इस प्रकार हर रोज यह फसल खराब हो गई है। दुकान दार के कहने पर उनको अपनी फसल बचाने के लिये हर सप्ताह दवाई का स्प्रे करना पड़ रहा है। जिस पर वे अब तक कई हजार की दवाई का स्प्रे कर चुके है, परन्तु उसके बाद भी अपनी कपास की फसल को नही बचा पाये। किसानों ने इसकी गिरदावरी करवा कर जल्दी ही मुआवजा देने की मांग की है। 
0 टिप्पणियाँ to "फसल पर पड़ी भयानक बीमारी की छाया- सूखी कपास की फसल"